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सफलता भाग 2 : सफलता की सोच - नकारात्मकता को पहचाने

हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं 

सुबह होते ही सबसे पहले आप यह सोचें कि आज हमें क्या-क्या करना है। हमेशा अच्छा सोचें, पॉजिटिव रहें, मन ही मन कार्यों में पूर्णतया सफलता की कामना रखें। जैसे हमारे विचार होते हैं और सच्चे मन से होते है उनके पूरे होने की सम्भावना अत्यधिक होती है। जब हम सफलता का विचार रखते हैं तो मन ही मन हम और दृढ़ संकल्प ले लेते हैं । 


अगर आप आपदाओं के बारे में सोचोगे तो वह आ जाएँगी. अगर आप मृत्यु के बारे में गंभीरता से सोचते हो तो आप अपनी मौत की ओर बढ़ने लगते हो। जब आप सकारात्मक  सोचोगे, तब इस विश्वास और निष्ठा के साथ आपका जीवन सुरक्षित हो जायेगा।

 जो आप अभ्यास करते रहते हैं, जो दोहराते हैं उस कार्य में विशिष्टता प्राप्त कर लेते हैं । सोच में काफी शक्ति होती है। यदि हम सोचते हैं कि काम अवश्य पूरा होगा तो यह यकीन मानिए कि काम होने की संभावना बहुत बढ़ गई है। ऐसा नहीं है कि केवल सोचने से कार्य हो जाता है पर यदि हम सफलता की सोच रखते हैं और वह कार्य करते हैं तो दिल और दिमाग दोनों उस कार्य में लग जाते हैं। परिणामस्वरूप, सफलता आपके कदम चूमती है। 

 

आप भी  सफल बन सकते  है,  आप  में वह सब गुण हैं जो एक व्यक्ति को सफल बनाते हैं। जितना अधिक आप अपने मस्तिष्क में  इस विश्वास  को बिठायेंगे उतना ही आप सफलता के पास जाएंगे।


सकारात्मक एवं नकारात्मक विचार 

सकारात्मकता और नकारात्मकता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। विचारों को हम दो भागों में बांट सकते हैंः सकारात्मक विचार एवं नकारात्मक विचार। यही आगे चलकर हमारे दृष्टिकोण का निर्धारण करते है| हम जैसा सोचते है वैसा बन जाते है। इसलिए कहा जाता है कि जैसे हमारे विचार होते हैं वैसा ही हमारा आचरण होता है| इसीलिए लोग बातचीत और नज़दीकी निरीक्षण द्वारा आपके विचार जानकर और आचरण देखकर मन में आपके प्रति एक धारणा बना लेते हैं। 

यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपने दिमाग रूपी ज़मीन में कौन सा बीज बोते हैं| हमें लगातार अपने दिमाग के प्रति सचेत रहना है। थोड़ी सी चेतना एवं सावधानी से हम कांटेदार पेड़ को महकते फूलों के पेड़ में बदल सकते हैं। 

सकारात्मक सोच की शुरुआत आशा और विश्वास से होती है| किसी जगह पर चारों ओर अंधेरा है और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा ,वहां पर अगर हम एक छोटा सा दीपक जला देंगे तो उस दीपक में इतनी शक्ति है कि वह छोटा सा दीपक चारों ओर फैले अंधेरे को दूर कर देगा| इसी तरह आशा की एक किरण सारे नकारात्मक विचारों को एक पल में मिटा सकती है| 

सफलता की सोच वाले लोग ही जीवन में सफल हो पाते है। आपके मन के विचार आपके स्वभाव के द्वारा सबके सामने आते है। आप जो भी बोलते हैं उससे साफ जाहिर हो जाता है कि आपकी सोच सकारात्मक है या नकारात्मक। सकारात्मक सोच वालों के आस पास सभी लोग रहना पसंद करते है जबकि नकारात्मक सोच वालों से लोग कन्नी काट लेते हैं । 

नकारात्मकता को पहचानें 

जाहिर तौर पर, यह संभव है कि किसी दी गई स्थिति में, प्रत्येक व्यक्ति लक्ष्य प्राप्त करने की संभावना के बारे में अलग-अलग  अनुभव कर सकता है। यहां तक ​​कि विभिन्न समय में एक ही व्यक्ति की अलग-अलग धारणा हो सकती है। सफलता या विफलता का पिछला अनुभव, भविष्य के लिए विशिष्ट धारणा की प्रवृत्ति का कारण बन सकता है। जिन लोगों को लगता है कि लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है उन्हें सकारात्मक मानसिकता के साथ माना जाता है, जबकि जिनके मन में यह विचार घर कर जाता है कि लक्ष्य प्राप्त करना असंभव है उन्हें नकारात्मक के रूप में चिह्नित किया जाता है।स्वयं को सुधारने के लिए नकारात्मकता को पहचानना बहुत आवश्यक है। हम समय-समय पर स्वयं निरीक्षण करें और अपने अंदर उठने वाली नकारात्मकता को तुरंत पहचानें । 

नकारात्मकता के सांकेतिक लक्षण 

 1: बहानेबाजी 

सावधान, जब कभी आपको ऐसा लगे कि कार्य ना करने के लिए आप कोई बहाना ढूंढ रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप नकारात्मक हो रहे हैं।आपके बहाने और आपके संदेह, आपको सफलता से दूर तो नहीं कर रहे? कहीं बहानेबाजी आपकी आदत का हिस्सा तो नहीं बनती जा रही ? सावधानी से आप इससे बाहर आ जाएं। 

2: दूसरों को दोष देना 

 दूसरों को दोष देने वाला व्यक्ति अधिकांशतः नकारात्मक होता है।इस प्रक्रिया में वह अपनी सफलता की शक्ति को उन लोगों और उन स्थितियों को सौंप देता है जिन्हें वह दोष देता है। 

जितना अधिक हम दोष देते हैं उतना अधिक कमजोर होते चले जाते हैं और मानसिक विक़ार का शिकार बन जाते हैं। धीरे-धीरे दोष देना हमारी आदत बन जाती है और हम आदतन कमजोर पड़ जाते हैं। 

अपनी वर्तमान स्थिति को पहचानें और देखें कि यह प्रवृत्ति बढ़ती तो नहीं जा रही ।दोष देना बंद कर दें। यकीन मानिए आप ज्यादा आत्मविश्वासी बनेंगे और आपकी शक्ति वापस आना शुरू हो जाएगी । जिससे आप अपने सबसे शक्तिशाली जीवन के निर्माता और अपने बेतहाशा सपनों के जनक होने के लिए तैयार होना शुरू कर देंगे।

 3: गपशप 

उन लोगों के बारे में बोलना या गपशप करना जो मौजूद नहीं हैं, अच्छी बात नहीं है। हो सकता है यह आपको क्षणिक सुख दे, परंतु यह कहीं ना कहीं आपको भीतर से खोखला करती है और आपकी सोच को प्रदूषित करती है। अनावश्यक गपशप क्षणिक सुख तो दे सकती है परंतु यह सफलता के आड़े आती है इसका एक और मुख्य कारण है समय की बर्बादी । 

 किसी और के दुर्व्यवहार, कमजोरियों की बातें अनावश्यक न करें। ऐसा पाया गया है कि यदि आप इसे बार-बार दोहराते हैं तो कहीं ना कहीं यह आपके दिमाग में घुस जाती है और इस मानसिकता के तहत आप उसी बुराई पर अमल करने लग जाते हैं। ज्यादातर लोग ऐसे व्यक्तियों को पसंद नहीं करते। 

 4: शिकायती टट्टू 

शिकायत करना क्रोध का एक नम्र रूप है। स्वयं को झांक कर देखें कि क्या आप आवश्यक शिकायत करते हैं या अनावश्यक? ऐसा तो नहीं जहां आपको हल देना है वहां आप सिर्फ कमी निकाल रहे हैं और शिकायत कर रहे हैं। 

अनावश्यक अधिक शिकायत करने की आदत अपने आप में एक नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती है। अधिकांशतः यह पाया जाता है कि जो लोग अपना काम ठीक से नहीं कर पाते वह अक्सर दूसरों के बारे में बड़बड़ाते हैं। यदि शिकायत करने की आदत ही पड़ जाए तो आपका मस्तिष्क उसी तरह से शिक्षित हो जाता है और हर चीजों में उन्हें कोई न कोई कमी अवश्य मिलती है। ऐसा अक्सर होता है कि जो लोग दूसरे के काम में कमी निकालते हैं वह जब स्वयं अपना काम करते हैं तो उसमें कुछ कमियाँ रह जाती हैं यदि आप यह शिकायत करें कि मुझे अवसर कम मिलते हैं तो यकीन मानिए आपको औरों के मुकाबले कम अवसर प्राप्त होंगे । “कितने मतलबी हैं” इसकी शिकायत करने वालों को अधिक मतलबी लोग ही मिलेंगे। 

इसलिए स्वयं को परखें कहीं लोग आपको शिकायती टट्टू तो नहीं कहते ? 

5: उदासीनता 

आपके मस्तिष्क को पूरी तरह से व्यस्त रखने के लिए नवीनता की आवश्यकता होती है। आप यदि नए विचारों नए तरीकों के लिए स्वयं मेहनत नहीं करते तो यकीन मानिए कि कुछ ही दिनों में आप वही कुछ करते रहेंगे जो आप कर रहे हैं और धीरे-धीरे बोर होने लगेंगे और उदासीन भी। साथ में उत्साह शनैःशनैः खत्म हो जाएगा , जिससे वह कार्य जो आप अच्छे ढंग से कर रहे थे उसकी गुणवत्ता कम होती चली जाएगी। नए विचारों से नए काम करने के तरीकों से डरे नहीं। नए तरीके नए कार्य से डरे हुए लोग अपने विचार नहीं बदल पाते हैं और आमतौर पर शिकायत करते हैं कि वे ऊब गए हैं। 

सकारात्मक सोच से आप नकारात्मक सोच की तुलना में हर चीज को बेहतर तरीके से कर सकते हैं

उदासीनता को पहचानें , उदासीनता और शिथिलता आपको सफलता से दूर ले जाती है। इसे त्याग कर पूर्ण ऊर्जा से सफलता के पथ पर दौड़ लगाएं। 


 6: मन का डर

 बहुत से लोग अपनी प्रतिभा का अपने मूल कौशल का सम्मान करने से इतना डरते हैं कि वे अपनी महत्वाकांक्षाओं को दबा लेते हैं। मैं कितने ही लोगों को जानता हूं जो एक अच्छा गाना गा सकते हैं या एक अच्छा लेख लिख सकते हैं मगर शायद किसी अनजाने डर की वजह से उसे उभरकर सबके सामने नहीं लाने देना चाहते ।जब तक आप अपने कौशल और प्रतिभा को समाज के सामने नहीं लाओगे तब तक आपको कैसे पता चलेगा कि आप किस धरातल पर खड़े हैं। यदि आप एक सफलता के मार्ग पर चलना चाहते हैं तो कहीं तो शुरुआत करनी पड़ेगी और उसकी विशिष्टता को धीरे-धीरे सुधारना होगा । अपने डर से बाहर निकल कर समाज में अपनी बेहतरीन रचनात्मकता पेश करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। याद रखिए कोई भी कार्य तब तक बहुत कठिन होता है जब तक हम उसे करना शुरू ना कर दें। 

किसी निराशावादी को हर अवसर में मुश्किलें दिखाई देती है वहीं आशावादी को मुश्किलों में अवसर दिखाई देता है

 कृपया ऊपर लिखित बिंदुओं पर विचार करें जो एक नकारात्मक मानसिकता की ओर इंगित करता है। इन से हमेशा दूर रहे। यह मानसिकता विशेष रूप से चुनौती पूर्ण समय में बहुत नुकसान पहुँचाती है। इन सब से दूर रहकर हम अपने क्षेत्र में महारत हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध रहें कि वे कभी भी उस क्षमता को प्रभावित नहीं होने देंगे जो आपके जीवन की सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। 

बहानेबाजी, दोषारोपण, गपशप, आलोचना उदासीनता और डर आपकी मूल प्रतिभा को कम कर देती है। ये लक्षण आपकी सफलता में रोड़े अटकाते हैं ।



क्रमशः….  अगले भाग में पढ़ें  - नकारात्मकता को सकारात्मकता  में कैसे बदले


Comments

  1. Wonderful analysis of thought process. Your thinking is the only step to where you want to tread.

    My best wishes

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