महामारी से महायुद्ध
... विजय रुस्तगी
हर गांव शहर जिला राज्य देश विश्व बच जाएगा ।
स्वयं को घरबंद रखो, ना एक कदम बाहर जाएगा।
समयबंधित महादानव स्वयं यहां मारा जाएगा ।
ना मिलो जुलो ना किसी के घर जाओ।
बातें करो सुनो, ना किसी को घर बुलाओ।
आज आराम करो, घर में ही कुछ खेलो।
खाओ पियो हंसो, घर में ही कुछ जी लो।
हर मानव यदि कोरोना से स्वयं को बचाएगा......
कठिन वक्त है कुछ दिन यूं ही गुजारो यारों।
पत्नी के पास बैठो,.बच्चों को सजाओ संवारो ।
अच्छा अवसर है अंदर की कला को उभारो।
योगा करो ध्यान करो, स्वयं को पहचानो|
हर मानव यदि कोरोना से स्वयं को बचाएगा......
याद आते हैं राजा राम और उनका वनवास।
याद आते हैं पांडव और उनका अज्ञात वास।
याद आती है काली और युद्ध रक्तबीज से।
एक एक बूंद रक्त की, न गिरने दी पी ली जीभ से।
हर मानव यदि कोरोना से स्वयं को बचाएगा.......
देखते ही देखते यूं ही वक्त निकल जाएगा।
महामारी के महायुद्ध में भारत जीत जाएगा।
सुख समृद्धि लौटेगी चहल-पहल वापस आएगी।
किलकारी मारती खुशियां हर एक को लुभाएगी।
हर मानव यदि कोरोना से स्वयं को बचाएगा.....
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Wah wah. Very good.
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