मां दुर्गा की उत्पत्ति
- विजय रुस्तगी
कारण:
पाताल लोक में रंभा नामक असुर का एक महत्वकांक्षी पुत्र था - महिषासुर। महिषासुर का मुंह भैंस की तरह था, इसलिए उसका नाम महिषासुर पड़ा । महिष एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है भैंस। महिषासुर बहुत शक्तिशाली बनकर अपने पाताल राज्य में स्वर्ग और पृथ्वी को शामिल करना चाहता था ।
वह ब्रह्मा का भक्त था । बहुत कठिन तपस्या की, जिससे ब्रह्मा प्रसन्न हो गए।
ब्रह्मा ने पूछा वर मांगो । महिषासुर ने अमर होने का वर मांगा। ब्रह्मा जी ने कहा कि इस संसार में कोई भी अमर नहीं हो सकता। कोई और वर मांगो।
बहुत सोच समझ कर महिषासुर ने कहा कि मेरी मृत्यु केवल नारी के हाथों ही हो। ब्रह्मा जी ने कहा तथास्तु। महिषासुर का मानना था कि नारी कमजोर होती हैं और एक नारी उसे मार ही नहीं सकती।महिषासुर को लगा कि यह वर प्राप्त कर वह अमर हो गया है ।
कालांतर में महिषासुर पाताल लोक का राजा बना और अपने अमर होने पर विश्वास करते हुए बहुत शक्तिशाली बना।
उसने भूलोक पर धावा बोल दिया और उस पर कब्जा कर नर नारियों को बहुत सताया। इसके बाद स्वर्ग लोक में धावा बोलकर देवताओं को एक बड़े भयंकर युद्ध में हरा दिया। ।
मां दुर्गा की उत्पत्ति की कथा:
भयभीत हो स्वर्ग के राजा इंद्र और उसके साथी देवता ब्रह्मा के पास गए । ब्रह्मा उन्हें शिव के पास ले गए। शिव के सुझाव पर सब मिलकर विष्णु धाम पहुंचे, ताकि इस समस्या का कोई हल निकले। ब्रह्मा विष्णु और शिव के युद्ध प्रयासों के बावजूद भी देवता महिषासुर को नहीं हरा सके । ब्रह्मा का वरदान जो प्राप्त था ।
ब्रह्मा विष्णु शिव और सभी देवता साथ साथ कैलाश पर्वत पर इकट्ठा हुए। गहन विचार विमर्श से यह निष्कर्ष निकला कि महिषासुर से छुटकारा पाने के लिए एक शक्तिशाली देवी का होना बहुत जरूरी है।
यह विचार आते ही सभी देवताओं ने अपनी अपनी शक्तियों का आव्हान किया। ब्रह्मा के मुख से तेज लाल सूर्य सा पुंज प्रकट हुआ। शिव ने नेत्र बन्द किए और उनके शरीर से सफेद चांदी सी चमक वाला तेज पुंज लहराया। तभी विष्णु की सोने सी शक्तिपुंज ने सबको चकाचौंध कर दिया। तीनो शक्तिपुंज मिलकर एक वृहद् शक्तिपुंज बना । इस वृहद् शक्ति पुंज से मां दुर्गा प्रकट हुई। ऐसा प्रतीत हुआ जैसे देवी के मुख पर शिव की गरिमा है , आंखे अग्नि ने बनाई है, वायु ने कान, कुबेर ने नाक , ब्रह्मा ने दांत बनाए हैं। भुजाओं में विष्णु की शक्ति है ।
इसलिए मां दुर्गा को शक्ति भी कहते हैं। उन्हें पार्वती का अवतार भी माना जाता है। उन्हें महालक्ष्मी भी कहा जाता है।
बहुत ही सुन्दर रूप वाली मां के आठ हाथ हैं। विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र दिया, शिव ने अपना त्रिशूल, इंद्र ने अपना वज्र, और सभी देवताओं ने अपनी अपनी शक्तियां देवी को दी । अति शक्तिशाली दुर्गा मां का सबने मिलकर बहुत श्रृद्धा के साथ भरपूर श्रृंगार किया । शंख, घंटियों की तेज ध्वनि से मां दुर्गा की आरती की । मां दुर्गा का स्वागत करते हुए उनकी अपरम्पार महिमा का गुणगान किया ।
जय मां दुर्गा जय मां दुर्गे
नमो नमो मां दुर्गे
नमो नमो मां दुर्गे
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