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सफलता 5 : शीर्ष पर पहुंचने के 7 नियम

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क्रमशः  …...अब तक आपने मेरे सफलता सीरीज़ के पिछले ब्लोग्स में पढ़ा कि “सफलता क्या है”, “सफलता की सोच” और “जो भी करें विशेष करें” ।    अब आगे पढ़िए….. 

शीर्ष पर पहुंचने के 7 नियम

सबसे अच्छा बनना यानी कि अपने देश में सबसे श्रेष्ठ,  आप  उच्चतम 5% का लक्ष्य रखें।  कैसे पहुंचे उच्चतम स्तर पर?   मैं आपको 7 नियम बताता हूं । यदि आप नीचे लिखे कदम उठाते हैं तो आप स्वयं को ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं और आपको एक विश्व स्तरीय व्यक्ति,  प्रोफेशनल  व्यवसायी या कलाकार बनने में अवश्य मदद मिलेगी।

  1. तुरंत शुरुआत

कई बार हम केवल उत्कृष्ट कार्य ही सामने लेकर आना चाहते हैं, पर हम सोचते ही रह जाते हैं  और देर हो जाती है  जैसा हमने पहले ही बताया है कि लक्ष्य की शुरुआत विचारों से होती  है। नया विचार आने के बाद उसे समझ कर लक्ष्य में परिवर्तित किया जाता है। यदि हम तुरंत कोई  कदम न उठाए तो यह विचार अपने आप ही सिमिटकर ग़ायब हो जाता है । आपका उत्साह कम होने लग जाता है, इसलिए एक स्थिति में जल्द ही शुरुआत कर लेनी चाहिए । आप अपने क्षेत्र में  कार्य का शीघ्र प्रारंभ करते हैं तो आपको धीरे-धीरे फीडबैक भी मिलने लगती है जिससे अपनी कार्यशैली में सुधार करते हैं और अद्वितीय बनने में सहायता मिलती है

बहुत कम लोग कार्य को तुरंत   शुरू कर पाते हैं।  ज्यादातर लोग तो शुरुआत की हिचकिचाहट में ही मारे जाते हैं  वे पूर्णतावाद के नाम पर काम करने में विलंब करते हैं। आप आसपास ऐसे लोगों को जानते होंगे जो लोग वर्षों से कह रहे हैं कि वे कुछ करने जा रहे हैं लेकिन कभी नहीं करते।

मैं एक ऐसे व्यक्ति को जानता हूं जिन्होंने एक पेशेवर संगीतकार बनने का लक्ष्य रखा ।बहुत जल्दी वह शौकिया  गाने  लगे थे और यूट्यूब पर पोस्ट भी करते थे, कई महीनों तक , उनके  काम  पर ज्यादातर किसी का ध्यान नहीं गया।  फिर एक रियलिटी शो में उन्हें गाने का मौका मिल गया फिर क्या , सब कुछ बदल गया।  इसी दौरान  उनकी एक पोस्ट भी  वायरल हो गई।कुछ समय पश्चात ही उन्हें कुछ  और शीर्ष  विनर्स के साथ-साथ  फिल्मी एजेंटों  ने संपर्क किया ।  अब वह संगीतकार के रूप में एक अद्भुत कैरियर बनाने के रास्ते पर थे।

जब आप कार्य करना प्रारंभ कर देते हैं, तो आप उन सफलताओं को प्राप्त करते हैं जो अधिक आत्मविश्वास का निर्माण करती हैं, सफलताओं का क्रम आपको और भी अधिक सफलता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करता है! "फोकस एंड फिनिश" का मूल मंत्र अपनाएं ।

2. कोचिंग / शिक्षा प्राप्त करें

सपने देखो और अपने सपनों को गंभीरता से  लो। ज्यादातर लोग सपने तो देखते हैं पर इसे  शीघ्र ही भूल जाते हैं। अद्भुत बनने के लिए  अपने सपनों को समझो, वहां तक पहुंचने  की योजना  बनाओ अपनी क्षमताओं का निरीक्षण कर अपनी कमियों को समझें क्या  मुझे किसी कोचिंग या शिक्षा की आवश्यकता है? आगे बढ़ने में सबसे बड़ी समस्या प्रतियोगिता है। यदि हम सबसे आगे बढ़ना चाहते हैं तो हमें अपने आपकी योग्यता और कुशलता की जांच करनी पड़ेगी ।  कहीं पर भी कमी होने पर बेहतर है कि हम उसके लिए पर्याप्त शिक्षा या कोचिंग प्राप्त करें। शिक्षा आपको औसत दर्जे से आगे बढ़ाती है। 

रमेश स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद आईएएस बनना चाहता था. हालांकि,  उसका सपना  उसकी कल्पना  आसमान में थी पर, वह पर्याप्त गंभीर नहीं था।

उसे लगता था कि वह एक अच्छा विद्यार्थी है  और अपनी कक्षा में हमेशा प्रथम आता है  उसने कुछ लोगों से बात कर  अपने  कॉलेज के  एक प्रोफेसर से पढ़ना शुरू किया । पर जैसे-जैसे वह आईएस परीक्षाओं के पुराने प्रश्न पत्र देखता तो उसे कहीं महसूस होने लग गया कि और अधिक कोचिंग की आवश्यकता है।  उसका एक दोस्त दिल्ली के एक  प्रसिद्ध कोचिंग सेंटर में कोचिंग ले रहा था। उससे आवश्यक सूचना प्राप्त कर रमेश ने दिल्ली के कोचिंग सेंटर में प्रवेश ले लिया। इस तरह उसे अच्छी कोचिंग भी प्राप्त हो गई और अपनी मेहनत,लगन और विश्वास के साथ उसने आईएएस की परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली।

3. सामान्य से ऊपर उठें

अगर  कोई तरीका  बहुत प्रचलित है तो  संभव है कोई और अच्छा तरीका निकल सकता है। ज्यादातर लोग  जो तरीका  अपनाते हैं  वह औसत  होता है और उसमें बहुत कुछ इंप्रूवमेंट किया जा सकता है।  सामान्य तौर-तरीके   उच्च कोटि के प्रदर्शन को रोकते हैं।   पारंपरिक तरीके से हटकर हम नए तरीके अपनाते हैं तभी विश्व में नाम कमा सकते हैं ।

आपको भीड़ से बाहर खड़े होने के लिए उस चीज़ की ओर भागना चाहिए जो  अलग हो और उससे अपनी एक नई पहचान बना सकें ।

ऐसा कई बार होता है कि हम कुछ नया करते हैं तो समाज उस व्यक्ति को पागल कहता है ।जब कुछ नया होता है तो कहीं ना कहीं कुछ कुछ पागलपन तो होता ही है। कुछ नया पाने के लिए एक सनक सवार होती है जो बाकी लोगों के विरोध या तानों से भी विचलित नहीं होती।  यदि आप जो कर रहे हैं वह आपको थोड़ा  बहुत पागलपन नहीं लगता है, तो आप शायद सुरक्षित  प्रचलित पथ का अनुसरण कर रहे हैं।  सबसे अलग और ऊंचा उठने के लिए हमें नए रास्ते चुनने  हैं।

निर्धारित तरीकों का पालन करने के बजाय, अपने स्वयं के नियम बनाएँ। अपनी सफलता को  पाने के लिए  स्वयं खेल को तैयार करें। घृणा,  कटुता, और  विरोध की तरफ ध्यान ना दें  ।   नए तौर तरीके और  विकसित तरीके   को प्रोत्साहित करने के लिए,  अपने दिल और अंदर की आवाज़ को सुनें । यदि आप खुद के प्रति सच्चे हैं, तो अच्छी चीजें अपनाएंगे। सफलता प्राप्त होने पर लोग खुद-ब-खुद आपके पास दौड़े चले आएँगे और आपके प्रशंसक बन जाएंगे।

4. लगातार प्रयत्न

 एक बहुत पुराना कबीर  का दोहा है -

                                     “ करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान 

      रसरी आवत जात ते सिल पर परत    निशान”

इसका अर्थ यह है  कि यदि रस्सी भी बार-बार पत्थर पर  घिसी जाती है तो पत्थर पर निशान पड़ जाता है यदि हम लगातार मेहनत करते हैं तो हम कहीं ना कहीं सफलता के द्वार तक पहुंच ही जाते हैं।  अर्जुन की तरह  अपने लक्ष्य पर ध्यान रखें और लगातार प्रयत्न करते रहें। लगातार  लक्ष्य की ओर दौड़ना ही  सफलता के द्वार  खोलता है।  यदि आप  विश्व में सर्वश्रेष्ठ कार्य बनाना चाहते हैं तो दैनिक अभ्यास  करें।  जैसे-जैसे दिन महीने और वर्ष  बीतते हैं आप पाएंगे कि आपका कार्य एक विशेष दर्जे की ओर बढ़ रहा  है, यहीं से सफलता प्रारंभ हो जाती है।

अधिकतर लोग इतना पेशेंस नहीं रखते हैं और बीच में ही इसे छोड़ देते हैं। यदि आप मैराथन में भाग ले रहे हैं तो अंत तक दौड़ना ही पड़ेगा। उसके लिए आपकी इच्छा शक्ति मजबूत होनी चाहिए।

गीता में यह कहा गया है कि  

कर्म किये जा फल की चिंता मत कर

यानी यदि हम अपना कार्य सही तरीके से करेंगे और अपने आप को फल की इच्छा से दूर रखेंगे तो वांछित परिणाम प्राप्त होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। कभी-कभी हम अपने आप को लक्ष्य से बहुत दूर पाते हैं और अधिक चिंतित हो जाते हैं, ऐसे में यदि हम अपनी इच्छा शक्ति को कमजोर होने देंगे तो सफलता हमसे दूर  होती चली जाएगी। वास्तव में, एक   हार की सोच आपको अपने वांछित परिणाम प्राप्त नहीं करने देगी।  कार्य मेहनत लगन और दिल से होना चाहिए। यदि हम परिणाम के पीछे भागते हुए मजबूरी में कार्य करें तो उससे वह गुणवत्ता नहीं प्राप्त हो सकती जितनी उस कार्य से, जो कमिटमेंट के साथ किया गया हो,  प्राप्त होती है.  

यदि आप थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लगातार निवेश करते हैं, तो अंततः चक्र-वृद्धि ब्याज लगता है और  आपका निवेश कई गुना हो जाता है। यह किसी भी आदत के लिए सही है, चाहे वह अच्छी हो या बुरी। यदि आप कुछ लंबे समय तक   एक ही प्रकार का अभ्यास करते हैं, तो  वह चक्र-वृद्धि रूप से प्रभावी होगा,  और आप  कई गुना परिणाम अनुभव करने लगेंगे।

 

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क्रमशः….  अगले ब्लॉग की प्रतीक्षा करें…….


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