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एक दृष्टांत - महाभारत से ……….. विजय रुस्तगी सत्य की महत्ता सभी को विदित है। पुराने ग्रंथों में और बचपन से ही प्राप्त शिक्षा के अनुसार सत्य अकाट्य है और किसी भी परिस्थिति में इससे विमुख नहीं हुआ जा सकता। पर क्या इसके भी कुछ अपवाद है? क्या यह सत्य नहीं, कि सामाजिक तौर-तरीकों में काफी प्रयोग होते रहते हैं और कोई एक तरीका हमेशा कारगर साबित नहीं ह...