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एक दृष्टांत - महाभारत से

                                               एक दृष्टांत - महाभारत से                                                                        ………..  विजय रुस्तगी सत्य की महत्ता सभी को विदित है।  पुराने ग्रंथों में और बचपन से ही प्राप्त शिक्षा के अनुसार सत्य  अकाट्य है और किसी भी परिस्थिति में इससे विमुख नहीं हुआ जा सकता।   पर क्या इसके भी कुछ अपवाद है?   क्या यह सत्य नहीं,  कि सामाजिक तौर-तरीकों में काफी प्रयोग होते रहते हैं और कोई एक तरीका हमेशा  कारगर साबित नहीं ह...

सफलता 5 : शीर्ष पर पहुंचने के 7 नियम

  कृपया मेरे ब्लॉग को सब्स्क्राइब ( ऊपर बने “Subscribe”  बटन को दबाकर) करें। और कमेन्टस् भी लिखे। क्रमशः  …...अब तक आपने मेरे सफलता सीरीज़ के पिछले ब्लोग्स में पढ़ा कि “सफलता क्या है”, “सफलता की सोच” और “जो भी करें विशेष करें” ।    अब आगे पढ़िए…..  शीर्ष पर पहुंचने के 7 नियम सबसे अच्छा बनना यानी कि अपने देश में सबसे श्रेष्ठ,  आप  उच्चतम 5% का लक्ष्य रखें।  कैसे पहुंचे उच्चतम स्तर पर?   मैं आपको 7 नियम बताता हूं । यदि आप नीचे लिखे कदम उठाते हैं तो आप स्वयं को ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं और आपको एक विश्व स्तरीय व्यक्ति,  प्रोफेशनल  व्यवसायी या कलाकार बनने में अवश्य मदद मिलेगी।     1. तुरंत शुरुआत कई बार हम केवल उत्कृष्ट कार्य ही सामने लेकर आना चाहते हैं, पर हम सोचते ही रह जाते हैं  और देर हो जाती है  जैसा हमने पहले ही बताया है कि लक्ष्य की शुरुआत विचारों से होती  है। नया विचार आने के बाद उसे समझ कर लक्ष्य में परिवर्तित किया जाता है। यदि हम तुरंत कोई  कदम न उठाए तो यह विचार अपने आप ही सिमिटकर ग़ायब हो ...

सफलता 4 : जो भी करो विशेष करो

  कृपया मेरे ब्लॉग को सब्स्क्राइब ( ऊपर बने “Subscribe”  बटन को दबाकर) करें। और कमेन्टस् भी लिखे।   क्रमशः  …...अब तक आपने मेरे सफलता सीरीज़ के पिछले ब्लोग्स में पढ़ा कि “सफलता क्या है” और “सफलता की सोच”।    अब आगे पढ़िए…..    विशेष यानी गुणवत्ता पर जोर यदि हम ज्यादा काम करें और उसमें गुणवत्ता न हो;  तो उससे अच्छा है कि हम कम करें मगर वह गुणवत्ता से भरा हो, विशेष हो,  दुनिया में अनोखा हो।  जो भी कार्य करें,  उसे पूर्णता से करें, उसके बारे में हमें पूर्ण ज्ञान हो।  पूर्णता और गुणवत्ता से  किया गया कार्य, अलग ही दिखता है, सभी को पसंद आता है  और यह सफलता की सीढ़ी बन जाता है।  कार्य ऐसा हो कि सभी पूछें, किसने किया, कैसे किया? अच्छा कार्य स्वयं बोलता है। कहीं नई टीम बन रही है तो ऐसे व्यक्तियों को  ढूंढ कर, पहले अवसर दिया जाता है।  मोनालिसा चित्र की तरह विशिष्ट गुणवत्ता से भरा कार्य  हो तो सबका ध्यान आकर्षित होता ही है,  साथ ही बहुत अच्छा प्रभाव  पड़ता है। दुनिया हमेशा महारत हासिल  लो...

सफलता भाग 3 - नकारात्मकता को सकारात्मकता में कैसे बदले

पिछले ब्लॉग में आपने सकारात्मक और नकारात्मक विचारों के बारे में जाना, यह भी मालूम हुआ कि अपने नकारात्मक विचारों को कैसे पहचाने, अब आगे पढ़िए…..  नकारात्मकता को सकारात्मकता में कैसे बदलें    नकारात्मकता को नकारात्मकता समाप्त नहीं कर सकती, नकारात्मकता को तो केवल सकारात्मकता ही समाप्त कर सकती है| इसीलिए जब भी कोई छोटा सा नकारात्मक विचार मन में आये हमें सचेत हो जाना चाहिए ।उसे उसी पल सकारात्मक विचार में बदल देना चाहिए|  सकारात्मक मानसिकता वाले लोगों की पहचान की जाती है और उन्हें टीम में शामिल किया जाता है।  पर हम आखिर ऐसा कैसे करें? आप नीचे लिखे कुछ नुस्खे आज़मा सकते हैं अ) आईने से बात करें   जब कभी हमें नकारात्मक सोच से पाला पड़े तो तुरंत आईने के सामने खड़े होकर स्वयं से मुस्कुराते हुए बोलें-  “आज मेरा दिन है मुझे पता है,  मैं आज सबसे अव्वल आऊंगा मैं विजेता हूँ”  क्या बोलना है वह शब्द अपनी परिस्थितियों के अनुसार चुनें।  ब) अपनी हथेलियों से बातें करें   अपनी हथेलियों को खोल कर उन्हें देखते हुए बोलें -   “मैं अपना भविष्य ख...

सफलता भाग 2 : सफलता की सोच - नकारात्मकता को पहचाने

हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं   सुबह होते ही सबसे पहले आप यह सोचें कि आज हमें क्या-क्या करना है। हमेशा अच्छा सोचें, पॉजिटिव रहें, मन ही मन कार्यों में पूर्णतया सफलता की कामना रखें। जैसे हमारे विचार होते हैं और सच्चे मन से होते है उनके पूरे होने की सम्भावना अत्यधिक होती है। जब हम सफलता का विचार रखते हैं तो मन ही मन हम और दृढ़ संकल्प ले लेते हैं ।  अगर आप आपदाओं के बारे में सोचोगे तो वह आ जाएँगी. अगर आप मृत्यु के बारे में गंभीरता से सोचते हो तो आप अपनी मौत की ओर बढ़ने लगते हो। जब आप सकारात्मक  सोचोगे, तब इस विश्वास और निष्ठा के साथ आपका जीवन सुरक्षित हो जायेगा।  जो आप अभ्यास करते रहते हैं, जो दोहराते हैं उस कार्य में विशिष्टता प्राप्त कर लेते हैं । सोच में काफी शक्ति होती है। यदि हम सोचते हैं कि काम अवश्य पूरा होगा तो यह यकीन मानिए कि काम होने की संभावना बहुत बढ़ गई है। ऐसा नहीं है कि केवल सोचने से कार्य हो जाता है पर यदि हम सफलता की सोच रखते हैं और वह कार्य करते हैं तो दिल और दिमाग दोनों उस कार्य में लग जाते हैं। परिणामस्वरूप, सफलता आपके कदम चूमती ह...

सफलता भाग 1: सफलता और लक्ष्य निर्धारण -- विजय रुस्तगी

सफलता भाग 1:  सफलता और लक्ष्य निर्धारण                             --  विजय रुस्तगी सफलता की परिभाषा बहुत सीधे सरल शब्दों में यदि हम कोई लक्ष्य निर्धारित करें  और उसे  निश्चित समय सीमा  में प्राप्त कर  लें,   उसे ही सफलता  कहते हैं । इसका अर्थ यह हुआ कि हम जो भी लक्ष्य निर्धारित करते हैं, उसे प्राप्त करने की एक समय सीमा होती है,  और उस समय सीमा के अंदर लक्ष्य को प्राप्त करना ही सफलता है।  जैसे मैं 2021 में आईएएस की परीक्षा पास करूँगा । जिंदगी में छोटे-बड़े कई लक्ष्य  हो सकते हैं|  कुछ लक्ष्य बहुत ही छोटे समय के लिए होते हैं और कुछ जीवन पर्यंत के लक्ष्य होते हैं। कई बार एक  मुख्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बहुत सारे छोटे छोटे लक्ष्य बनाने पड़ते हैं।  ऐसे छोटे-छोटे और बड़े बड़े कई लक्ष्यों को हम समय-समय पर निर्धारित करते हैं और  ऐसी कई छोटी बड़ी सफलताएँ हमें प्राप्त होती हैं। लक्...